33 C
Mumbai
42.1 C
Delhi
36 C
Kolkata
Saturday, May 25, 2024

Tenalirama Story | कौन बडा

एक बार राजा कॄष्णदेव राय महल में अपनी रानी के पास विराजमान थे। तेनालीराम की बात चली, तो बोले सचमुच हमारे दरबार में उस जैसा चतुर कोई और नहीं हैं इसलिए अभी तक तो कोई उसे हरा नहीं पाया हैं।
सुनकर रानी बोली आप कल तेनालीराम को भोजन के लिए महल में आमंत्रित करें। मैं उसे जरुर हरा दूंगी। राजा ने मुस्कुराकर हामी भर ली । अगले दिन रानी ने अपने अपने हाथों से स्वादिष्ट पकवान बनाए। राजा के साथ बैठा तेनालीराम उन पकवानों की जी भर के प्रशंसा करता हुआ, खाता जा रहा था। खाने के बाद रानी ने उसे बढिया पान का बीडा भी खाने को दिया।

तेनालीराम मुस्कराकर बोला “सचमुच, आज जैसा खाने का आनंद तो मुझे कभी नहीं आया!” तभी रानी ने अचानक पूछ लिया, “अच्छा तेनालीराम एक बात बताओ। राजा बडे हैं या मैं? अब तो तेनालीराम चकराया। राजा-रानी दोनों ही उत्सुकता से देख रहे थे कि भला तेनालीराम क्या जवाब देता हैं। अचानक तेनालीराम को जाने क्या सूझा, उसने दोनों हाथ जोडकर पहले धरती को प्रणाम किया, फिर एकाएक जमीन पर गिर पडा। रानी घबराकर बोली “अरे-अरे, यह क्या तेनालीराम?”

तेनालीराम उठकर खडा हुआ, और बोला “महारानी जी, मेरे लिए तो आप धरती हैं और राजा आसमान! दोनों में से किसे छोटा, किसे बडा कहूं कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं! वैसे आज महारानी के हाथों का बना भोजन इतना स्वादिष्ट था कि उहीं को बडा कहना होगा इसलिए मैं धरती को ही दंडवत प्रणाम कर रहा था।”

सुनकर राजा और रानी दोनों की हंसी छूट गई। रानी बोली “सचमुच तुम चतुर हो तेनालीराम। मुझे जिता दिया, पर हारकर भी खुद जीत गए।” इस पर महारानी और राजा कॄष्णदेव राय के साथ तेनालीराम भी खिल-खिलाकर हंस दिए।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike

Latest Articles