31 C
Mumbai
31.1 C
Delhi
30 C
Kolkata
Thursday, May 23, 2024

Tenalirama Story | तपस्या का सच

विजयनगर राज्य में बड़ी जोरदार ठंड पड़ रही थी। राजा कृष्णदेव राय के दरबार में इस ठंड की बहुत चर्चा हुई। पुरोहित ने महाराज को सुझाया। ‘महाराज, यदि इन दिनों यज्ञ किया जाए तो उसका फल उत्तम होगा। दूर-दूर तक उठता यज्ञ का धुआँ सारे वातावरण को स्वच्छ और पवित्र कर देगा।’
दरबारियों ने एक स्वर में कहा, ‘बहुत उत्तम सुझाव है पुरोहित जी का। महाराज को यह सुझाव अवश्य पसंद आया होगा।’ दरबारियों ने एक स्वर में कहा, ‘बहुत उत्तम सुझाव है पुरोहित जी का। महाराज को यह सुझाव अवश्य पसंद आया होगा।’ महाराज कृष्णदेव राय ने कहा-‘ठीक है। आप आवश्यकता के अनुसार हमारे कोष से धन प्राप्त कर सकते हैं।’

‘महाराज, यह महान यज्ञ सात दिन तक चलेगा। कम-से-कम एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ तो खर्च हो ही जाएँगी।’ प्रतिदिन सवेरे सूर्योदय से पहले मैं नदी के ठंडे जल में खड़े होकर तपस्या करुँगा और देवी-देवताओं को प्रसन्न करुँगा। और अगले ही दिन से यज्ञ शुरू हो गया। इस यज्ञ में दूर-दूर से हजारों लोग आते और ढेरों प्रसाद बँटता है।

पुरोहित जी यज्ञ से पहले सुबह-सवेरे कड़कड़ाती ठंड में नदी के ठंडे जल में खड़े होकर तपस्या करते, देवी-देवताओं को प्रसन्न करते। लोग यह सब देखते और आश्चर्यचकित होते। एक दिन राजा कृष्णदेव राय भी सुबह-सवेरे पुरोहित जी को तपस्या करते देखने के लिए गए। उनके साथ तेनालीराम भी था।

ठंड इतनी थी कि दाँत किटकिटा रहे थे। ऐसे में पुरोहित जी को नदी के ठंडे पानी में खड़े होकर तपस्या करते देख राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम से कहा, ‘आश्चर्य! अदभुत करिश्मा है! कितनी कठिन तपस्या कर रहे हैं हमारे पुरोहित जी। राज्य की भलाई की उन्हें कितनी चिंता है!’

‘वह तो है ही। आइए महाराज…जरा पास चलकर देखें पुरोहित जी की तपस्या को।’ तेनालीराम ने कहा। ‘लेकिन पुरोहित जी ने तो यह कहा है कि तपस्या करते समय कोई पास न आए। इससे उनकी तपस्या में विघ्न पैदा होगा।’ राजा ने कहा।

‘तो महाराज, हम दोनों ही कुछ देर तक उनकी प्रतीक्षा कर लें। जब पुरोहित जी तपस्या समाप्त करके ठंडे पानी से बाहर आएँ, तो फल-फूल देकर उनका सम्मान करें।’ राजा कृष्णदेव राय को तेनालीराम की यह बात जँच गई। वह एक ओर बैठकर पुरोहित को तपस्या करते देखते रहे।

काफी समय गुजर गया लेकिन पुरोहित जी ने ठंडे पानी से बाहर निकलने का नाम तक न लिया। तभी तेनालीराम बोल उठा- ‘अब समझ में आया। लगता है ठंड की वजह से पुरोहित जी का शरीर अकड़ गया है। इसीलिए शायद इन्हें पानी से बाहर आने में कष्ट हो रहा है। मैं इनकी सहायता करता हूँ।’

तेनालीराम नदी की ओर गया और पुरोहित जी का हाथ पकड़कर उन्हें बाहर खींच लाया। पुरोहित जी के पानी से बाहर आते ही राजा हैरान रह गए। उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। वे बोले, ‘अरे, पुरोहित जी की तपस्या का चमत्कार तो देखो! इनकी कमर से नीचे का सारा शरीर नीला हो गया।’

तेनालीराम हँसकर बोला, ‘यह कोई चमत्कार नहीं है, महाराज। यह देखिए…सर्दी से बचाव के लिए पुरोहित जी ने धोती के नीचे नीले रंग का जलरोधक पाजामा पहन रखा है।’ राजा कृष्णदेव राय हँस पड़े और तेनालीराम को साथ लेकर अपने महल की ओर चल दिए। पुरोहित दोनों को जाते हुए देखता रहा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike

Latest Articles