29.2 C
Mumbai
30.1 C
Delhi
32 C
Kolkata
Friday, April 19, 2024

Tenalirama Story | रंग-बिरंगी मिठाइयॉ

बसन्त् ॠतु छाई हुई थी। राजा कॄष्णदेव राय बहुत ही प्रसन्न थे। वे तेनाली राम के साथ बाग में टहल रहे थे। वे चाह रहे थे कि एक ऐसा उत्सव मनाया जाए जिसमें उनके राज्य के सारे लोग सम्मिलित हों। पूरा राज्य उत्सव के के आनन्द में डूब जाए। इस विषय में वह तेनाली राम से भी राय लेना चाहते थे। तेनाली राम ने राजा की इस सोच की प्रशंसा की और इस प्रकार विजयनगर में राष्ट्रीय उत्सव मनाने का आदेश दिया गया । शीघ्र ही नगर को स्वच्छ करवा दिया गया, सडकों व इमरतों पर रोशनी की गई। पूरे नगर को फूलों से सजाया गया। सारे नगर में उत्सव का वातावरण था।
इसके बाद राजा ने घोषणा की कि राष्टीय उत्सव को मनाने के लिए मिठाइयों की दुकानों पर रंग-बिरंगी मिठाइयॉ बेची जाएँ। घोषणा के बाद मिठाई की दुकान वाले मिठाइयॉ बनाने में व्यस्त हो गए।

कई दिनों से तेनाली राम दरबार में नहीं आ रहा आ रहा था। राजा ने तेनाली राम को ढूँढने के लिए सिपाहियों को भेजा, परन्तु वे भी तेनाली राम को नहीं ढूँढ पाए। उन्होंने राजा को इस विषय में सूचित किया। इससे राजा और भी अधिक चिन्तित हो गए। उन्होंने तेनाली राम को सतर्कतापूर्वक ढूँढने का आदेश् दिया। कुछ दिन बाद सैनिकों ने तेनाली राम को ढूँढ निकाला। वापस आकर वे राजा से बोले, “महाराज, तेनाली राम ने कपडों की रंगाई की दुकान खोल ली है तथा वह सारा दिन आपने इसी काम में व्यस्त रहता है। जब हमने उसे अपने साथ आने को कहा तो उसने आने से मना कर दिया।”

यह सुनकर राजा क्रोधित हो गए। वह सैनिकों से बोले, “मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि तेनाली राम को जल्दी से जल्दी पकड कर यहॉ ले आओ। यदि वह तुम्हारे साथ न आए तो उसे बलपूर्वक लेकर आओ।”

राजा के आदेश का पालन करते हुए सैनिक तेनाली राम को बलपूर्वक पकडकर दरबार में ले आए।

राजा ने पूछा, “तेनाली, तुम्हें लाने के लिए जब मैंने सैनिकों को भेजा, तो तुमने शाही आदेश का पालन क्यों नहीं किया तथा तुमने यह रंगरेज की दुकान क्यों खोली? हमारे दरबार में तुम्हारा अच्छा स्थान है, जिससे तुम अपनी सभी आवश्यकताएँ पूरी कर सकते हो।”

तेनाली राम बोला,” महाराज दरअसल मैं राष्ट्रीय उत्सव के लिय अपने वस्त्रों को रँगना चाहता था। इससे पहले कि सारे रंगों का प्रयोग दूसरे कर लें, मैं रंगाई का कार्य पूर्ण कर लेना चाह्ता था।”

“सभी रंगों के प्रयोग से तुम्हारा क्या तात्पर्य है? क्या सभी अपने वस्त्रों को रंग रहे हैं?” राजा ने पूछा।

“नहीं महाराज, वास्तव में रंगीन मिठाइयॉ बनाने के आपके आदेश के पश्चात सभी मिठाई बनाने वाले मिठाइयों को रंगने के लिए रंग खरीदने में व्यस्त हो गए हैं। यदि वे सारे रंगों को मिठाइयों को रंगने के लिए खरीद लेंगे तो मेरे वस्त्र कैसे रंगे जाएँगे?”

इस पर राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ । वह बोले, “तो तुम यह कहना चाहते हो कि मेरा आदेश अनुचित है। मेरे आदेश का लाभ उठाकर मिठाइयॉ बनाने वाले मिठाइयों को रंगने के लिए घटिया व हानिकारक रंगो का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हें केवल खाने योग्य रंगों का ही उपयोग करना चाहिए ” इतना कहकर महाराज ने तेनाली राम को देखा। तेनाली राम के चेहरे पर वही चिर-परिचित मुस्कुराहट थी।

राजा कॄष्णदेव राय ने गम्भीर होते हुए आदेश दिया कि जो मिठाई बनाने वाले हानिकारक रासायनिक रंगों का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें कठोर दण्ड दिया जाए।

इस प्रकार तेनाली राम ने अपनी बुध्दि के प्रयोग से एक बार फिर विजयनगर के लोगों की रक्षा की।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike

Latest Articles